अपडेट: 22 अक्टूबर 2026
शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे सत्र में बिकवाली हुई। BSE सेंसेक्स 460.30 अंक (0.62%) टूटकर 73,249.39 पर बंद हुआ। NSE निफ्टी 123.70 अंक (0.54%) फिसलकर 22,687.65 पर आ गया।
सबसे ज्यादा दबाव क्रूड ऑयल से आया। PTI के मुताबिक सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड 3.23% चढ़कर 112.33 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, और बाजार इसी बात से डरा हुआ है।
अगर आपका पोर्टफोलियो लाल दिख रहा है, तो कोई भी फैसला लेने से पहले नीचे दिए आंकड़े देख लें।
आज बाजार में क्या हुआ
गिरावट चौतरफा रही। HDFC Sky के मुताबिक 2,670 शेयर गिरे और 1,323 चढ़े। IANS के अनुसार निफ्टी मिडकैप 100 में 0.87% और स्मॉलकैप 100 में 1.17% की गिरावट रही।
- कमजोर सेक्टर: IIFL के आंकड़ों में निफ्टी मीडिया 2.34%, FMCG 1.74% और IT 1.31% टूटे।
- फार्मा: लगभग सपाट रहा। IANS ने इसे बढ़त में बंद बताया है, जबकि IIFL के आंकड़ों में इसमें 0.21% की गिरावट है। सिप्ला 1.29% चढ़ा।
- बड़े लूजर: रिलायंस करीब 2% और नेस्ले इंडिया 2.8% टूटे (HDFC Sky)। CNBC-TV18 के मुताबिक Eternal करीब 3% गिरा। HDFC बैंक भी लाल निशान में बंद हुआ।
- बढ़ने वाले: बजाज फाइनेंस 1.74%, सिप्ला 1.29% और ICICI बैंक 0.97% चढ़े।
- रुपया और VIX: PTI के मुताबिक रुपया 43 पैसे टूटकर 94.81 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बाजार में डर का पैमाना India VIX 0.51% बढ़कर 15.81 पर पहुंचा।
- FII और DII: प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹3,458.70 करोड़ के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹2,891.32 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।
बाजार गिरा, फिर भी Jio Platforms के IPO की मांग बनी रही। HDFC Sky के मुताबिक दूसरे दिन दोपहर 3 बजे तक इश्यू 4.38 गुना भर चुका था। दूसरे दिन का अंतिम आंकड़ा यह खबर लिखे जाने तक जारी नहीं हुआ था। Jio IPO का सब्सक्रिप्शन और GMP यहां पढ़ें। इंडेक्स के ताजा आंकड़े gpaisa मार्केट्स पेज पर देखें।
गिरावट का हिसाब: हाई से कितना नीचे है निफ्टी
निफ्टी ने 5 जनवरी 2026 को कारोबार के दौरान 26,373.20 का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। नीचे की तालिका में यह रिकॉर्ड इंट्राडे का है, बाकी सभी स्तर बंद भाव हैं।
| कब | निफ्टी का स्तर | आज तक गिरावट (अंक) | गिरावट (%) |
|---|---|---|---|
| ऑल-टाइम हाई (5 जनवरी 2026, इंट्राडे) | 26,373.20 | 3,685.55 | 13.97% |
| 3 महीने पहले (22 जुलाई 2026) | 23,996.25 | 1,308.60 | 5.45% |
| 1 महीने पहले (22 सितंबर 2026) | 23,329.00 | 641.35 | 2.75% |
| आज (22 अक्टूबर 2026) | 22,687.65 | — | — |
गणना: (पुराना स्तर − आज का बंद) ÷ पुराना स्तर × 100। स्रोत: TradingView, Investing.com, HDFC Sky।
सेंसेक्स का रिकॉर्ड 86,159.02 है, जो 1 दिसंबर 2025 को इंट्राडे में बना था। आज के बंद भाव पर सेंसेक्स उससे 14.98% नीचे है। 22 जुलाई को यह 76,755.05 पर बंद हुआ था, यानी तीन महीने में 4.57% की गिरावट। ताजा तीन सत्रों में निफ्टी 16 अक्टूबर के 23,146.15 के बंद भाव से 1.98% फिसला है।
शेयर बाजार क्यों गिर रहा है: पांच बड़ी वजहें
| वजह | ताजा आंकड़ा | तुलना |
|---|---|---|
| ब्रेंट क्रूड | 112.33 डॉलर/बैरल (22 अक्टूबर) | 22 जुलाई को 92 डॉलर से कुछ ऊपर |
| रेपो रेट | 5.50% (7 अक्टूबर से) | पहले 5.25% |
| खुदरा महंगाई (CPI) | 5.54% (सितंबर) | अगस्त में 4.8% |
| FPI बिकवाली | ₹52,100 करोड़ (अक्टूबर में, 19 अक्टूबर की रिपोर्ट) | 2026 में अब तक ₹3.12 लाख करोड़ |
| रुपया | 94.81 प्रति डॉलर | एक दिन में 43 पैसे कमजोर |
| India VIX | 15.81 | पिछला बंद 15.68 |
1. क्रूड ऑयल 110 डॉलर के पार
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। Fortune के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार सुबह (अमेरिकी समय) ब्रेंट 113.21 डॉलर पर था। एक महीने पहले यह 100.64 डॉलर और एक साल पहले 64.49 डॉलर था।
SBI Securities के सनी अग्रवाल ने PTI से कहा कि सऊदी अरामको के तेल क्षेत्र पर हमलों के बाद ब्रेंट 3% उछला। महंगा तेल देश का आयात बिल और कंपनियों की लागत, दोनों बढ़ाता है।
2. RBI ने ब्याज दर बढ़ाई
7 अक्टूबर को RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया। नीति का रुख भी न्यूट्रल से बदलकर calibrated tightening कर दिया गया। MPC के बयान के मुताबिक निकट भविष्य में दर कटौती की उम्मीद नहीं है।
ऊंची ब्याज दर से कंपनियों का कर्ज महंगा होता है और शेयरों के वैल्यूएशन पर दबाव आता है। MPC की अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर को है। रेपो रेट बढ़ने का आपकी EMI पर असर यहां पढ़ें।
3. महंगाई फिर बढ़ने लगी
RBI के मुताबिक अगस्त में खुदरा महंगाई (CPI) 4.8% थी। NSO के सितंबर के आंकड़ों में यह 5.54% हो गई और खाद्य महंगाई 7.74% पर पहुंच गई। RBI ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए 6.0% महंगाई का अनुमान दिया है।
4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
The Hans India ने 19 अक्टूबर को डिपॉजिटरी CDSL के आंकड़ों के हवाले से बताया कि FPI अक्टूबर में अब तक ₹52,100 करोड़ के शेयर बेच चुके हैं। 2026 में कुल निकासी ₹3.12 लाख करोड़ है, जबकि पूरे 2025 में यह ₹1.66 लाख करोड़ थी।
Choice Wealth के धीरज गौड़ के मुताबिक ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर और महंगा क्रूड भारतीय शेयरों पर भारी पड़ रहे हैं। Geojit Investments के वीके विजयकुमार ने 11 अक्टूबर को कहा था कि 10 साल के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर 5.2% से ज्यादा यील्ड के चलते भारतीय शेयर विदेशी निवेशकों को कम आकर्षक लग रहे हैं।
5. कमजोर रुपया और ग्लोबल संकेत
रुपया कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों का डॉलर में रिटर्न घट जाता है। गुरुवार को एशिया के बाजारों में भी भारी बिकवाली हुई। IIFL के अनुसार दक्षिण कोरिया का Kospi 3.10%, हांगकांग का Hang Seng करीब 3% और जापान का Nikkei 2.05% गिरा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा ने ANI से कहा कि वैश्विक और घरेलू, दोनों तरह की मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताएं बाजार के मूड पर भारी रहीं।
घरेलू निवेशक और SIP अब भी टिके हुए
विदेशी निवेशक बेच रहे हैं, लेकिन घरेलू पैसा लगातार आ रहा है। AMFI के आंकड़ों (IANS) के मुताबिक सितंबर 2026 में SIP के जरिए रिकॉर्ड ₹32,490 करोड़ आए। अगस्त में यह रकम ₹32,297 करोड़ थी। इक्विटी फंडों में शुद्ध निवेश 30.6% बढ़कर ₹38,306.55 करोड़ रहा। गुरुवार को भी DII की खरीदारी ने FII की बिकवाली का बड़ा हिस्सा संभाल लिया।
SIP वालों के लिए गणित
मान लीजिए आप किसी फंड में हर महीने ₹10,000 की SIP करते हैं और तीन महीनों में उसकी NAV ₹100 से गिरकर ₹80 पर आ जाती है। NAV यानी फंड की एक यूनिट का भाव। तय रकम से सस्ती NAV पर ज्यादा यूनिट मिलती हैं।
| महीना | NAV | निवेश | मिली यूनिट |
|---|---|---|---|
| पहला | ₹100 | ₹10,000 | 100.00 |
| दूसरा | ₹90 | ₹10,000 | 111.11 |
| तीसरा | ₹80 | ₹10,000 | 125.00 |
| कुल | — | ₹30,000 | 336.11 |
उदाहरण, असली फंड नहीं। यूनिट दो दशमलव तक राउंड की गई हैं।
- औसत लागत: ₹30,000 ÷ 336.11 = करीब ₹89.26 प्रति यूनिट। तीनों NAV का सीधा औसत ₹90 है, फिर भी आपकी लागत उससे कम है, क्योंकि सस्ती NAV पर ज्यादा यूनिट आईं।
- तीसरे महीने की वैल्यू: 336.11 × ₹80 = ₹26,888.89, यानी ₹3,111.11 (10.37%) का कागजी घाटा। पूरे ₹30,000 पहले महीने ₹100 पर एकमुश्त लगाए होते, तो वैल्यू ₹24,000 होती, यानी 20% घाटा।
- ब्रेक-ईवन: NAV ₹89.26 से ऊपर जाते ही यह SIP फायदे में आ जाती है। NAV फिर ₹100 पर पहुंचे, तो वैल्यू ₹33,611.11 यानी 12.04% फायदा होगा। यह सिर्फ अंकगणित है, NAV लौटने की कोई गारंटी नहीं।
SIP नुकसान से नहीं बचाती, यह सिर्फ खरीद की लागत को अलग-अलग भावों पर बांटती है। NAV और गिरी तो कागजी घाटा भी बढ़ेगा। अपनी रकम और अवधि के हिसाब से अनुमान SIP कैलकुलेटर पर लगाएं।
घबराहट में ये गलतियां न करें
- SIP बंद करना: गिरावट में SIP रोकने से सस्ती NAV पर यूनिट खरीदने का मौका छूट जाता है। पैसों की तंगी हो तो अपने फंड हाउस से SIP की रकम घटाने या कुछ समय रोकने का विकल्प पूछें।
- बिना वजह घाटे में बेचना: बेचते ही कागजी घाटा असली घाटा बन जाता है। बेचने की वजह फंड का कमजोर प्रदर्शन या आपकी पैसों की जरूरत होनी चाहिए, एक दिन की गिरावट नहीं।
- उधार या लीवरेज से खरीदना: लोन, मार्जिन या F&O के सहारे बड़ा दांव लगाने पर गिरावट जारी रहे तो नुकसान कई गुना हो सकता है।
- टिप्स के पीछे भागना: सोशल मीडिया या मैसेजिंग ग्रुप की पक्की कमाई वाली टिप्स से बचें। सलाह देने वाला SEBI में रजिस्टर्ड है या नहीं, SEBI की वेबसाइट पर जांचें।
क्या करें
- एसेट एलोकेशन देखें: इक्विटी, डेट और गोल्ड में आपका पैसा किस अनुपात में है, यह जांचें। गिरावट से इक्विटी का हिस्सा लक्ष्य से कम हो गया हो, तो उसे धीरे-धीरे संतुलित किया जा सकता है।
- इमरजेंसी फंड अलग रखें: कुछ महीनों के जरूरी खर्च जितना पैसा सुरक्षित जगह रखें, ताकि मुश्किल वक्त में गिरे बाजार में फंड न बेचने पड़ें।
- किस्तों में निवेश करें: एकमुश्त रकम लगानी हो तो उसे कुछ महीनों में बांटकर लगाने पर विचार करें। अलग-अलग रकम का हिसाब म्यूचुअल फंड कैलकुलेटर पर देखें।
- लक्ष्य की अवधि देखें: जिस पैसे की जरूरत अगले एक-दो साल में है, वह इक्विटी के उतार-चढ़ाव के लिए ठीक नहीं।
यह निवेश सलाह नहीं है। हर निवेशक की आय, जोखिम उठाने की क्षमता और लक्ष्य अलग होते हैं। बाजार आगे किस तरफ जाएगा, यह कोई पक्के तौर पर नहीं बता सकता। बड़ा फैसला लेने से पहले SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शेयर बाजार क्यों गिर रहा है?
कई वजहें एक साथ हैं: 112 डॉलर से ऊपर पहुंचा ब्रेंट क्रूड, 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बढ़ोतरी, सितंबर में 5.54% पर पहुंची महंगाई, अक्टूबर में FPI की भारी बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेत।
सेंसेक्स आज कितने अंक गिरा?
22 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स 460.30 अंक (0.62%) गिरकर 73,249.39 पर और निफ्टी 123.70 अंक (0.54%) गिरकर 22,687.65 पर बंद हुआ।
निफ्टी अपने हाई से कितना नीचे है?
निफ्टी का रिकॉर्ड 26,373.20 है, जो 5 जनवरी 2026 को इंट्राडे में बना था। 22 अक्टूबर के बंद भाव पर निफ्टी उससे 13.97% नीचे है।
क्या SIP बंद कर देनी चाहिए?
यह आपकी पैसों की जरूरत और लक्ष्य पर निर्भर है। गिरावट में चलती SIP से कम NAV पर ज्यादा यूनिट मिलती हैं और औसत लागत घटती है, पर फायदे की गारंटी नहीं होती। अपना हिसाब SIP कैलकुलेटर पर लगाएं।
क्रूड ऑयल महंगा होने से शेयर बाजार क्यों गिरता है?
भारत ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है, कंपनियों की लागत बढ़ती है और महंगाई का खतरा बढ़ता है।
स्रोत
- HDFC Sky: 22 अक्टूबर मार्केट क्लोज
- IIFL: सेक्टोरल इंडेक्स और एशियाई बाजार
- The Hans India (IANS): मिडकैप, स्मॉलकैप, फार्मा
- Asianet Newsable (ANI): गेनर-लूजर
- CNBC-TV18: FII/DII आंकड़े
- ThePrint (PTI): रुपया और ब्रेंट
- HDFC Sky: India VIX
- Investing.com: निफ्टी के बंद भाव
- HDFC Sky: 22 जुलाई 2026 मार्केट क्लोज
- TradingView: निफ्टी का रिकॉर्ड स्तर
- Outlook Business: सेंसेक्स का रिकॉर्ड
- RBI: मौद्रिक नीति बयान, 7 अक्टूबर 2026
- IndexBox: सितंबर की CPI महंगाई
- Fortune: ब्रेंट क्रूड
- The Hans India: अक्टूबर में FPI बिकवाली
- Free Press Journal: FPI और अमेरिकी यील्ड
- The Hans India (IANS): AMFI SIP डेटा
- HDFC Sky: Jio IPO सब्सक्रिप्शन
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। gpaisa.in SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार नहीं है।

